
15 दिनों के भीतर शंभू राम को हटाने का कारण सार्वजनिक करने की मांग, सामाजिक न्याय और सम्मानजनक राजनीतिक भागीदारी का मुद्दा उठाया
विकास कुमार (बुलंद टीवी)
गढ़वा। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की गढ़वा जिला समिति भंग कर 17 सदस्यीय जिला संयोजक मंडली गठित किए जाने के बाद पार्टी के अंदर सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। झामुमो के जिला संगठन सचिव सुनील कुमार गौतम ने केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाते हुए रविदास समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है। सुनील कुमार गौतम ने कहा कि जिला अध्यक्ष शंभू राम को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले बिना नोटिस दिए पद से हटाने और बाद में जिला समिति भंग करने के पीछे क्या संगठनात्मक कारण हैं, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई जिला संयोजक मंडली में रविदास समाज के किसी भी प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया जाना चिंता का विषय है। उन्होंने झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल करते हुए कहा कि क्या रविदास समाज की भूमिका केवल चुनाव में वोट देने और पार्टी के लिए मेहनत करने तक सीमित है? यदि समाज के लोग संगठन को मजबूत बनाने और चुनाव में योगदान देते हैं, तो उन्हें नेतृत्व में सम्मानजनक भागीदारी क्यों नहीं मिलनी चाहिए? श्री गौतम ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरोध में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और सम्मानजनक राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए है। उन्होंने गढ़वा जिले के समाज के गणमान्य लोगों से भी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने और अपनी राय रखने की अपील की।उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से 15 दिनों के भीतर शंभू राम को पद से हटाने का कारण सार्वजनिक करने तथा संगठन में रविदास समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर झामुमो में शामिल रविदास समाज के लोग आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।




